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Sunday, 8 January 2012

महेंद्र कपूर : भारत का रहने वाला हूँ......


संगीत के लिहाज से हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में अपनी मधुर आवाज से सरोबोर करने वाले कई महान गायक हुए है.लेकिन आज हम जिस महान गायक के बारे में बात करने जा रहें है,उन्होंने कभी प्यार के नगमें गाये,तो कभी देश भक्ति से भरे जोशीले गीत,हिंदी सिनेमा के परदे पर उन्हें मनोज कुमार की आवाज के रूप में जाना जाता था.हाँ आज हम बात कर रहे है,हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध पार्श्वगायक महेंद्र कपूर जी की.और हाँ धारावाहिक महाभारत  के शुरु होते ही एक बुलंद आवाज गूंजती थी...महाभारत ....!यह आवाज किसी और की नहीं बल्कि महेंद्र कपूर जी की ही थी.महेंद्र कपूर जी की आवाज आज भी हिंदी सिने प्रेमियों के दिल में बसती है.
महेंद्र कपूर जी का जन्म 9 जनवरी1934 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था.लेकिन वह बाल्यावस्था में ही वह मुंबई आ गए थे.कपूर जी बचपन से ही रफी जी प्रभावित थे और उनकी दिली ख्वाहिश थी कि वह भी फिल्मो के लिए गाये.इसलिए उन्होंने शुरुवात में शास्त्रीय संगीत की तालीम ली.उनके गायन कैरियर की शुरुवात 1950 के दशक में अखिल भारतीय युवा महोत्सव में गायन स्पर्धा में जीत हासिल करके की.यह प्रतियोगिता उनके लिए मील का पत्थर साबित हुई और उन्हें वी.शांताराम की फिल्म नवरंग  (1958)में गाने का मौका मिला.इस फिल्म में उन्होंने 'आधा है चन्द्रमा रात आधी 'गीत गया.इस गीत ने पुष्टि कर दी कि पार्श्वगायन की दुनिया में एक नयी प्रतिभा का पदार्पण हो चुका है.यह गीत आज भी संगीत प्रेमियो का पसंदीदा गीत है.इस गीत के बाद उन्होंने एक से बढकर एक सुपर हिट गीत गए.
महेंद्र कपूर जी ने फ़िल्मी दुनियां के कई सितारों के लिए पार्श्वगायन किया पर मनोज कुमार के साथ उनकी जोड़ी खासी कामयाब रही.मनोज जी के साथ उनकी ठीक वैसी ही जोड़ी बनी जैसी महान अभिनेता राजकपूर जी के लिए सुर सम्राट मुकेश जी की.महेंद्र कपूर ने मनोज कुमार के लिए 'उपकार','शहीद','पूरब और पश्चिम','क्रांति','रोटी कपडा और मकान' जैसी कई फिल्मो में पार्श्वगायन किया.
निर्माता-निर्देशक वी.आर.चोपड़ा की फिल्मे 'हमराज','गुमराह ','धूल का फूल','वक्त ',धुंध' में विशेष रूप से यादगार गाने गाये.वी.आर.चोपड़ा से उनका साथ टी.वी.धारावाहिक महाभारत  में भी रहा.धारावाहिक महाभारत के शीर्षक गीत को कपूर साहब ने ही स्वर दिया था.
हिंदी फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने पंजाबी,भोजपुरी और मराठी फिल्मों के लिए कुल 25000 से भी अधिक गीत गाये.सन 1956 से लेकर 1999 तक वो संगीत के क्षेत्र में सक्रिय रहे.
साल 1968 में आई फिल्म 'उपकार' के बहुचर्चित गीत 'मेरे देश की धरती सोना उगले' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का पुरस्कार मिला था.साल 1963 में फिल्म 'गुमराह' के गीत 'चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाये' के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार मिला था.बाद में एक बार फिर से साल 1967 में फिल्म 'हमराज' के 'नीले गगन के तले' के लिए उन्हें फिल्म फेयर पुरस्कार मिला.उनके जीवन का तीसरा फिल्म फेयर पुरस्कार फिल्म 'रोटी  कपड़ा और मकान' के 'नहीं नहीं और नहीं'के लिए 1974 में मिला.बाद में उन्हें पद्मश्री और महाराष्ट्र सरकार के लतामंगेशकर सम्मान से नवाजा गया.
चार साल पहले 27 सितम्बर 2008 को 74 वर्ष की उम्र में महेंद्र कपूर साहब इस दुनिया से सदा के लिए विदा हो गए.उनका नश्वर शरीर भले ही हमारे बीच न हो,लेकिन वे ऐसी विरासत छोड़कर गए है.जहाँ उनकी आवाज का जादू बना रहेगा और श्रोताओ को रोमांचित करते रहेगें. 


  










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