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Friday, 28 September 2012

धक-धक गर्ल : माधुरी दीक्षित


कोई इन्हें धक-धक गर्ल कह कर पुकारता है.तो कोई गजगामिनी,दुनिया तो इन्हें नये दौर की मधुबाला कह कर पुकारती है.जब कभी परदे पर डांस करते नजर आई,तो दर्शकों के दिलों पर छा गई.अभिनेत्री माधुरी दीक्षित हिंदी फिल्मों में अपने अभिनय के दम पर सफलता की ऊचाई को छूने वाली एक शानदार अभिनेत्री हैं.माधुरी दीक्षित का जन्म 15 मई 1967 को मुंबई में एक मराठी परिवार में हुआ.इनका पूरा नाम माधुरी शंकर दीक्षित है.इनके पिता का नाम शंकर व माता का नाम स्नेहलता दीक्षित है.इनकी शुरुवाती शिक्षा मुंबई यूनीवर्सिटी में हुई.साथ में इन्होंने कत्थक नृत्य भी सीखा जो इन्हें बहुत पसंद था.                             
माधुरी ने अपने अभिनय की शुरुवात साल 1984 में राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ‘अबोध’ से की,जो एक फ्लॉप फिल्म थी.इसके बाद साल 1985 में इनकी एक और फिल्म ‘आवरा बाप’ हिंदी सिनेमा के परदे पर आई,लेकिन कुछ कमाल नही दिखा पाई और बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप घोषित हुई.इसके बाद माधुरी एक साल घर पर बैठी रही और सोचती रही कि शायद वह भारतीय सिनेमा के लिए अनफिट है और उन्हें अपनी डॉक्टर बनने की आकांक्षा पर ध्यान देना चाहिए.लेकिन इसी बीच इन्होने एन.चंद्रा की फिल्म ‘तेजाब’ साइन की,जिससे इनके जीवन के सारें समीकरण बदल गये.फिल्म जबरदस्त हिट हो गयी.इसी फिल्म का एक गीत ‘एक दो तीन.....’तो लोकप्रियता की सीमाएं लांघकर उस दौर का सर्वश्रेष्ठ गीत बन गया था.
इसके बाद माधुरी दीक्षित ने फिल्म जगत में खूब काम किया.90 के दशक में दीवाना मुझ सा नही, इज्जतदार,जमाई राजा,किशन-कन्हैया,थानेदार आदि फिल्मों ने जबरदस्त सफलता पाई.दिल,बेटा,और       हम आपके है कौन ने सफलता के सारे रिकार्ड तोड़ दिए और माधुरी दीक्षित उस दौर में अभिनेत्री नंबर वन बन गयी थी.साल 1984 से लेकर 1999 तक माधुरी ने खिलाफ,प्रहार,प्रतिकार,खेल,  संगीत ,खलनायक,    साजन,साहिबा, राम-लखन,राजा,आरजू,आंसूबनेअंगारे,कोयला,राजकुमार,महानता,प्रेमग्रंथ,मृत्युदंड,परिंदा,       मोहब्बत आदि फिल्मे की.विश्व प्रसिद्ध चित्रकार व माधुरी के प्रशंसक मकबूल फ़िदा हुसैन ने माधुरी को लेकर एक फिल्म ‘गजगामिनी’बनाई थी.
साल 1999 में माधुरी दीक्षित ने भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टर श्री राम नेने से शादी कर ली और अमेरिका चली गयी.लेकिन कुछ वर्षों बाद पुनः मुंबई वापस आकार उन्होंने निर्देशक व निर्माता संजय- लीला भंसाली की फिल्म ‘देवदास’में काम किया,जो कि एक साधारण फिल्म थी.इसके बाद इनकी एक और फिल्म ‘आ जा नच ले’आई ये भी बॉक्स ऑफिस पर फेल हो गयी.बहरहाल माधुरी आजकल छोटे परदे के शो ‘झलक दिखला जा’ में दिखाई पड़ रही है.लेकिन सुनने में आया है कि जल्द ही वह बड़े पर पुनःवापसी करेगी.       

Sunday, 8 January 2012

महेंद्र कपूर : भारत का रहने वाला हूँ......


संगीत के लिहाज से हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में अपनी मधुर आवाज से सरोबोर करने वाले कई महान गायक हुए है.लेकिन आज हम जिस महान गायक के बारे में बात करने जा रहें है,उन्होंने कभी प्यार के नगमें गाये,तो कभी देश भक्ति से भरे जोशीले गीत,हिंदी सिनेमा के परदे पर उन्हें मनोज कुमार की आवाज के रूप में जाना जाता था.हाँ आज हम बात कर रहे है,हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध पार्श्वगायक महेंद्र कपूर जी की.और हाँ धारावाहिक महाभारत  के शुरु होते ही एक बुलंद आवाज गूंजती थी...महाभारत ....!यह आवाज किसी और की नहीं बल्कि महेंद्र कपूर जी की ही थी.महेंद्र कपूर जी की आवाज आज भी हिंदी सिने प्रेमियों के दिल में बसती है.
महेंद्र कपूर जी का जन्म 9 जनवरी1934 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था.लेकिन वह बाल्यावस्था में ही वह मुंबई आ गए थे.कपूर जी बचपन से ही रफी जी प्रभावित थे और उनकी दिली ख्वाहिश थी कि वह भी फिल्मो के लिए गाये.इसलिए उन्होंने शुरुवात में शास्त्रीय संगीत की तालीम ली.उनके गायन कैरियर की शुरुवात 1950 के दशक में अखिल भारतीय युवा महोत्सव में गायन स्पर्धा में जीत हासिल करके की.यह प्रतियोगिता उनके लिए मील का पत्थर साबित हुई और उन्हें वी.शांताराम की फिल्म नवरंग  (1958)में गाने का मौका मिला.इस फिल्म में उन्होंने 'आधा है चन्द्रमा रात आधी 'गीत गया.इस गीत ने पुष्टि कर दी कि पार्श्वगायन की दुनिया में एक नयी प्रतिभा का पदार्पण हो चुका है.यह गीत आज भी संगीत प्रेमियो का पसंदीदा गीत है.इस गीत के बाद उन्होंने एक से बढकर एक सुपर हिट गीत गए.
महेंद्र कपूर जी ने फ़िल्मी दुनियां के कई सितारों के लिए पार्श्वगायन किया पर मनोज कुमार के साथ उनकी जोड़ी खासी कामयाब रही.मनोज जी के साथ उनकी ठीक वैसी ही जोड़ी बनी जैसी महान अभिनेता राजकपूर जी के लिए सुर सम्राट मुकेश जी की.महेंद्र कपूर ने मनोज कुमार के लिए 'उपकार','शहीद','पूरब और पश्चिम','क्रांति','रोटी कपडा और मकान' जैसी कई फिल्मो में पार्श्वगायन किया.
निर्माता-निर्देशक वी.आर.चोपड़ा की फिल्मे 'हमराज','गुमराह ','धूल का फूल','वक्त ',धुंध' में विशेष रूप से यादगार गाने गाये.वी.आर.चोपड़ा से उनका साथ टी.वी.धारावाहिक महाभारत  में भी रहा.धारावाहिक महाभारत के शीर्षक गीत को कपूर साहब ने ही स्वर दिया था.
हिंदी फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने पंजाबी,भोजपुरी और मराठी फिल्मों के लिए कुल 25000 से भी अधिक गीत गाये.सन 1956 से लेकर 1999 तक वो संगीत के क्षेत्र में सक्रिय रहे.
साल 1968 में आई फिल्म 'उपकार' के बहुचर्चित गीत 'मेरे देश की धरती सोना उगले' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का पुरस्कार मिला था.साल 1963 में फिल्म 'गुमराह' के गीत 'चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाये' के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार मिला था.बाद में एक बार फिर से साल 1967 में फिल्म 'हमराज' के 'नीले गगन के तले' के लिए उन्हें फिल्म फेयर पुरस्कार मिला.उनके जीवन का तीसरा फिल्म फेयर पुरस्कार फिल्म 'रोटी  कपड़ा और मकान' के 'नहीं नहीं और नहीं'के लिए 1974 में मिला.बाद में उन्हें पद्मश्री और महाराष्ट्र सरकार के लतामंगेशकर सम्मान से नवाजा गया.
चार साल पहले 27 सितम्बर 2008 को 74 वर्ष की उम्र में महेंद्र कपूर साहब इस दुनिया से सदा के लिए विदा हो गए.उनका नश्वर शरीर भले ही हमारे बीच न हो,लेकिन वे ऐसी विरासत छोड़कर गए है.जहाँ उनकी आवाज का जादू बना रहेगा और श्रोताओ को रोमांचित करते रहेगें.