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Saturday, 23 July 2011

मुकेश : ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना....

  वेमोहम्द रफ़ी,मन्ना डे और किशोर कुमार जैसे महान गायकों के समकालीन थे.तथा 60 से 70 दशक की हिंदी फिल्मों में अपनी आवाज के जरिये छाये रहे.वे अभिनेता राजकपूर की आवाज बन गए थे.इन्होनें अभिनेता राजकपूर अभिनित अधिकतर फिल्मों में राजकपूर के लिए अपनी आवाज दी.इनके निधन पर राजकपूर जी ने स्वयं कहा था आज मैंने अपनी आवाज खो दी है.हाँ आज हम बात करने वाले है.हिंदी फिल्मों के महान गायक  मुकेश जी की.हिंदी फिल्म जगत में मुकेश जी अपनी अलग तरह की आवाज के लिए हमेशा याद किये जायेगें.उनकें गीत आज भी लोगो को सुकून देते है.उनकी आवाज उनके देहांत के करीब 36 साल बाद भी श्रोताओं के दिल में बसी है.
मुकेश जी का पूरा नाम मुकेश चन्द्र माथुर था.वह 22 जुलाई 1923 को एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्में थे.उन्हें अभिनय और गायन का बचपन से ही शौक था और वे गायक के.एल.सहगल के प्रशंसक थे.मात्र दसवीं तक पढने के बावजूद उन्हें लोक निर्माण कार्य में सहायक सर्वेक्षण विभाग में नौकरी मिल गयी.जहाँ पर उन्होंने केवल सात महीने तक काम किया.पर शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था.दिल्ली में उन्होंने चुपके से कई गैर  फ़िल्मी गानों की रिर्काडिंग करी.इसी गायकी और अभिनय के शौक ने उन्हें दिल्ली छोड़कर मुंबई आने पर विवश कर दिया और वे फिल्म स्टार बनने के लिए नौकरी छोड़कर मुंबई आ गए.और वे अपने रिश्तेदार व प्रसिद्ध कलाकार मोतीलाल के यहाँ ठहरने लगे.
मुकेश ने यूं तो अपने कैरियर की शुरुवात 1941 में फिल्म 'निर्दोष' में अभिनेता-गायक के तौर पर की,लेकिन पार्श्वगायक के तौर पर उन्हें अपना पहला काम साल 1945 में फिल्म 'पहली नजर' में मिला.इसके संगीतकार अनिल विश्वास जी थे{इनके बारे में फिर कभी बात होगी}.हिंदी फिल्म में जो पहला गाना मुकेश जी गाया था वह था "दिल जलाता है तो जलने दो...."जिसमे अदाकारी मोतीलाल जी ने की थी.इस गीत में मुकेश जी के आदर्श गायक के.एल.सहगल का प्रभाव साफ दिखा.इसी गीत के बाद उनका पहला युगल गीत फिल्म 'उस पार' में गायिका कुसुम के साथ "ज़रा बोली री हो...."था.फिर उन्होंने फिल्म 'मूर्ति'में "बदरिया बरस गयी उस पार....."खुर्शीद के साथ गाया.उस समय तक उन्होंने सुनने वालो के मन में अपनी जगह बना ली थी.इसके बाद उन्होंने फिल्म 'आग' 'अनोखी अदा' और 'मेला' में लोगो ने सुना और उनकी आवाज के जादू से देश के सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए.
 साल 1949 में उन्होंने एक और मील का पत्थर पार किया वो था उनका ,महान अभिनेता राजकपूर और महान संगीत कार शंकर जयकिशन का मिलना.राजकपूर जी उनसे और शंकर जयकिशन जी से अपने आर.के.फिल्म्स के लिए गानों की फरमाईश करते रहते थे.उसके बाद तो 'आवारा' और 'श्री 420'जैसी फिल्मो में गए गए गाने "आवारा हूँ......" व "मेरा जूता है जापानी ......." से  उनकी    आवाज देश ही नहीं विदेश में भी शोहरत पायी.रूस में तो "आवारा हूँ ....."सड़को पर सुनाई देने लगा था.'आह''आवारा''बरसात''श्री 420''अनाड़ी''जिस देश में गंगा बहती है'संगम''मेरा नाम जोकर' व कुछ अन्य राजकपूर जी फिल्मों में मुकेश जी द्वारा गाये गए गाने आज भी तरो-ताजा लगते है.
अब थोड़ी बात मुकेश जी के गृहस्थ जीवन की जाय.मुकेश जी ने सरल जी से साल 1946 में शादी कर ली थी.मुकेश जी के एक बेटा और दो बेटियां है जिनके नाम-नितिन मुकेश,रीटा और नलिनी.जिसमे नितिन मुकेश ने अपने पिता मुकेश के तरह गायकी में हाथ आजमाया और लोगो ने काफी पसंद किया.
साल 1976 में अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह में मुकेश जी एक कार्यक्रम के सिलसिले में अमेरिका के मिशिगन गए.वही उनका 27 अगस्त 1976 को दिल का दौरा पड़ने से देहांत हो गया.उनकी मृत्यु के पश्चात भी उनके द्वारा गाये गये गानों से सजी कई फिल्मे रिलीज हुई ये फ़िल्में 'धरमवीर''सत्यम शिवम सुन्दरम''अमर अकबर एंथोनी''खेल खिलाडी का''दरिंदा' प्रमुख थी.लोगो ने इनके गीतों में मुकेश की आवाज को खूब पसंद किया.मुकेश के द्वारा गाई गई 'तुलसी रामायण'आज भी लोगो के भक्ति भाव से झूमने को मजबूर कर देती है.करीब 200 से अधिक फिल्मों में आवाज देने वाले मुकेश ने संगीत की दुनियां में अपने आपको को दर्द का बादशाह तो साबित किया ही इसके साथ-साथ वैश्विक गायक के रूप में अपनी पहचान बनाई.फिल्म फेयर पुरूस्कार पाने वाले वह पहले पुरूष गायक थे.
केवल 56 साल की उम्र में इस दुनियां से अलविदा कहने वाले इस महान गायक की आवाज सुनकर दुनियां वाले शायद यही कहेगें.........."मै न भूलूँगा..."







 

4 comments:

गुड्डोदादी said...

आदरनीय
लेख पढ़ अच्छा लगा नितिन मुकेश जी ने यही गीत शिकागो में ग्ग्या और उनकी आखों में आंसूं थे

गुड्डोदादी said...

आदरनीय
लेख पढ़ अच्छा लगा नितिन मुकेश जी ने यही गीत शिकागो में ग्ग्या और उनकी आखों में आंसूं थे

गुड्डोदादी said...

आदरनीय
लेख पढ़ अच्छा लगा मुन्ना नितिन मुकेश जी ने यही गीत शिकागो में गाया दिल जलता है तो जलने दे और उनकी आखों में आंसूं थे

गुड्डोदादी said...

आदरनीय
लेख पढ़ अच्छा लगा मुन्ना नितिन मुकेश जी ने यही गीत शिकागो में गाया दिल जलता है तो जलने दे और उनकी आखों में आंसूं थे

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