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Thursday, 14 July 2011

मदन मोहन : मेरा साया साथ होगा...

स्वर साम्राज्ञी लता जी उनके संगीत की कायल थी और उन्हें संगीत का शहजादा कहा करती थी,महान संगीतकार यस.डी.बर्मन ने भी कहा था कि उन जैसा संगीतकार दुनिया में मिलना मुश्किल है,उनके एक गीत 'आपकी नजरो ने समझा प्यार के काबिल मुझे ......' के संगीत से मशहूर संगीतकार नौशाद इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस धुन के बदले उन्हें अपनी सारी धुनें देने की ख्वाहिश जाहिर की थी.हाँ अपने बिलकुल ठीक समझा आज मै बात करने वाला हूँ महान संगीतकार मदन मोहन जी की....आज भी उनकी कशिश भरी आवाज और उतना ही उम्दा संगीत रूह में समा जाने वाला है.लोग उनके संगीत के दीवाने थे.                                                             सन 1950 से 1970 तक के तीन दशको में संगीत की धूम मचाने वाले इस महान संगीतकार का पूरा नाम मदन मोहन कोहली था.मदन मोहन जी का जन्म 25 जून 1924 को बग़दाद,इराक में हुआ था.जहाँ इनके पिता राय बहादुर चुन्नीलाल इराकी पुलिस के साथ एक एकाउंटेंट जनरल के रूप में काम करते थे.मध्य पूर्व में जन्मे मदन मोहन जी ने अपने जीवन के पहले पाँच साल यही पर बिताए.भारत आने के बाद पिता राय बहादुर चुन्नीलाल फिल्म व्यवसाय से जुड़ गए. तथा बाम्बे टाकीज और फिल्मिस्तान जैसे बड़े स्टूडियो में साझीदार बन गए.घर में फिल्मी माहौल होने के कारण मदन मोहन भी फिल्मो में काम करके बड़ा नाम कमाना चाहते थे,लेकिन पिता के कहने पर उन्होंने सेना में भर्ती होने का फैसला ले लिया और देहरादून में सेना की नौकरी शुरू कर दी.कुछ दिनों बाद उनका तबादला दिल्ली हो गया.लेकिन कुछ दिनों बाद उनका मन नौकरी में न लगा,उनका मन संगीत की तरफ खिच रहा था.इसलिए नौकरी छोड़ कर लखनऊ आ गए और लखनऊ आकाशवाणी में नौकरी कर ली.आकाशवाणी में उनकी मुलाकात संगीत जगत से जुड़े उस्ताद फैयाज खां,उस्ताद अली अकबर बेगम और तलत महमूद जैसी जानीमानी हस्तियों से हुई.जिससे इनका मन पूर्ण रूप से संगीत की ओर हो गया.और वह अपने को नया रूप देने के लिए लखनऊ से बम्बई {अब मुंबई}आ गए.
और  सबसे पहले उन्हें ख्याति प्राप्ति संगीतकारों सी.रामचंद्र और यस.डी.बर्मन के सहायक के रूप में काम करने का मौका मिला.इसके बाद उन्हें पहली बार सन 1950 में देवेन्द्र गोयल द्वारा निर्देशित फिल्म 'आखें' के लिए बतौर संगीतकार अपनी धुनें दी.फिल्म 'आखें'के बाद स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर मदन मोहन की चहेती पाश्र्व गायिका बन गयी.और वह अपनी हर फिल्म के लिए लता जी से ही गाने की गुजारिश किया करते थे.लता जी भी उनके संगीत निर्देशन से काफी प्रभावित थी और आपकी नजरों ने समझा .....,मेरा साया साथ होगा.....,नैना  ओ  बरसे  नैनो  में  बदरा  छाय.....,माई री मै कासे कहूँ ...,अगर मुझसे मोहबब्त है खेलो न मेरे दिल से ....,लग जा गले न तुम वेवफा हो......,वो भूली दास्ताँ ....सहित लगभग 210 गाने मदन मोहन जी की धुन पर गाये.और मदन मोहन जी के पसंदीदा गीतकार के तौर पर राजा मेहंदी अली खान,राजेंद्र कृष्ण और कैफी आजमी का नाम सबसे पहले आता है.लता जी ने गीतकार राजेंद्र किशन के लिए मदन मोहन जी की धुन पर कई गीत गए है.जिसमें यू हसरतो के दाग.......'अदालत'{1958},सपने में सजन दो बातें .....'गेटवे ऑफ इंडिया'{1957},मैंने तो तुम संग नैन .......'मनमौजी',भूली वो दास्तां......'संयोग'{1961},जैसे सुपरहिट गीत उन तीनों फनकारो की तिगड़ी बेमिसाल है.फिल्म 'हंसते जख्म' का गीत आज सोचा तो आँसू भर आये......गाते वक्त लता जी रो पड़ी थी.मदन मोहन जी के संगीत निर्देशन में आशा भोसले ने फिल्म 'मेरा साया'के लिए झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में ....गाना गया जिसको सुनकर श्रोता आज भी झूम उठते है                                                                                                    वर्ष1970 में प्रदर्शित फिल्म 'दस्तक'के लिए मदन मोहन जी को सर्वश्रेष्ठ संगीत का पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.तीन दशक लंबे अपने फ़िल्मी कैरियर में उन्होंने लगभग 100 फिल्मों के लिए संगीत दिया.सुपर हिट संगीत देने वाले मदन मोहन जी ने अपने जीवन में कई उतार-चढाव देखे.यह एक दुर्भाग्य था कि उन्होंने जिन फिल्मों में संगीत दिया,उनमें से अधिकतर बॉक्स ऑफिस पर टिक न सकी लेकिन उनका संगीत हर व्यक्ति को सम्मोहित कर लेता था.फ़िल्मी दुनिया के स्वार्थ व धोखेबाजी से उन्हें कई बार काफी नुकसान हो गया.जिसके कारण वह शराब के आदी हो गए.अंततः मधुर संगीत लहरियों से श्रोताओ के दिल में खास जगह बना लेने वाले मदन मोहन जी 14 जुलाई 1975 को इस दुनिया से जुदा हो गए.उनकी मौत के बाद उनके संगीत निर्देशन में बनी फिल्म 'मौसम'और 'लैला मजनूं'रिलीज हुई,जिसके संगीत का जादू आज भी श्रोताओ को मंत्रमुग्ध कर देता है.वर्ष 2004 में यश चोपड़ा की फिल्म 'वीर जारा'में मदन मोहन जी की उन धुनों को लिया गया,जिन्हें वे अपने जीते जी नहीं कर सके......संगीतकार के अलावा वे एक अच्छे गायक भी थे.आज भले ही यह महान संगीतकार हम सभी के बीच नहीं है,लेकिन यह संगीत का सितारा सदा ही अपनी धुनों के लिए हम सभी के दिलो में चमकता रहेगा.............   

                                                       
                                                                                                

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